रूस और आस्ट्रेलिया में जनसंख्या का वितरण | जनसंख्या वृद्धि का विकास पर प्रभाव

आस्ट्रेलिया में जनसंख्या का वितरण 

आस्ट्रेलिया में जनसंख्या अन्य महाद्वीपों की अपेक्षा कम है। आस्ट्रेलिया-ओशेनिया महाद्वीप की जनसंख्य 3,99,01,355 है, यहाँ विश्व की केवल 1% जनसंख्या निवास करती है। जो मुख्यतः तटीय प्रदेशों में ही केन्द्रित पाई जाती है। विशेषतः दक्षिणी-पश्चिमी कोने और दक्षिणी-पूर्वी किनारों पर जहाँ जलवायु अधिक समशीतोष्ण है। यहाँ जनसंख्या के पाँच क्षेत्र मिलते हैं

(1) सिडनी के पीछे के पश्चिमी ढाल,
2) विक्टोरिया का अधिकतर भाग, (
3) क्वीन्सलेण्ड का दक्षिणी-पूर्वी कोना,
4) दक्षिणी आस्ट्रेलिया का दक्षिणी भाग और
5) स्वानलैण्ड का दक्षिणी-पश्चिमी कोना। इसके अतिरिक्त आस्ट्रेलिया में

जनसंख्या बिखरी हुई है। यहाँ जनसंख्या का जमाव दक्षिणीहै तट पर ही अधिक है। पश्चिमी तथा भीतरी आस्ट्रेलिया में शुष्कता के कारण जनसंख्या बहुत ही कम है।

इस महाद्वीप का सबसे बड़ी विशेषता यह हे कि यहाँ जनसंख्या का जमाव नगरों के निकट ही पाया जाता है। लगभग 50 प्रतिशत जनसंख्या छः बड़े नगरों में ही केन्द्रित है जो यहाँ के प्रान्तों की राजधानियाँ हें।

घनत्व की दृष्टि से आस्ट्रेलिया महाद्वीप में जनसंख्या का वितरण इस प्रकार हैं

  1. मध्यम जनसंख्या बाले क्षेत्र — पूर्वी आस्ट्रेलिया, दक्षिणी-पूर्वी तट, पश्चिमी तथा दक्षिणी तट तथा उत्तरी मध्यम जनसंख्या वाले क्षेत्र हैं। इस क्षेत्र में जनसंख्या का औसत घनत्व 10 से 30 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी. है। तस्मानिया द्वीप भी इसी श्रेणी में आता है।

 

  1. अधिक जनसंख्या बाले क्षेत्रआस्ट्रेलिया में सबसे अधिक जनसंख्या दक्षिणी-पूर्वी तथा दक्षिणी-पश्विमी भाग तथा कर ली द्र तटीय भागों में निवास करती है। यहाँ घनी जनसंख्या के क्षेत्र मरे-डार्लिंग का डेल्टा, स्वान का डेल्टा, तथा सिडनी का निकटवर्ती भाग है। इस क्षेत्र में 100 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी में निवास करते हैं।
  2. न्यून जनसंख्या वाले क्षेत्रपर्वतीय, पठारी तथा मरुस्थलीय भागों में सबसे कम जनसंख्या निवास करती है। गिब्सन मरुभूमि एवं विक्टोरिया मरुभूमि में सबसे विरल जनसंख्या पायी जाती है। इस क्षेत्र में जनसंख्या का घनत्व 1 से 2 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है।..

आस्ट्रेलिया भारत के क्षेत्रफल से ढाई गुना बड़ा है किन्तु वहाँ की जनसंख्या अपेक्षाकृत इसलिए कम है, क्योंकि आस्ट्रेलिया के दक्षिणी पूर्वी तटीय क्षेत्र में ही सघन जनसंख्या की दृष्टि से उत्तम दशाएँ उपलब्ध हें। शेष भाग कृषि, वर्षा, आवास आदि की दृष्टि से उत्तम व अनुकूल नहीं है। आस्ट्रेलिया महाद्वीप के मध्य भाग में मरूस्थल की उपस्थिति ने जनसंख्या को कम करने में अपना योगदान दिया हे।

 

अफ्रीका में जनसंख्या का वितरण 

अफ्रीका की जनसंख्या का वितरण 1,21,61,29,815 है। अफ्रीका में भी जनसंख्या का वितरण बड़ा असमान और सीमान्त है। सबसे घनी जनसंख्या नील की घाटी, भूमध्यसागरीय तट, केनिया एवं अबीसीनिया के पठार, पश्चिमी सडान, और गिनी तट पर मिलती है। अन्यत्र जनसंख्या बहुत कम है, क्योंकि अधिकांशतः भूमि मरुस्थली हे तथा कृषि के अयोग्य है। सहारा मरुस्थल अफ्रीका के 1/5 भाग की ओर कालाहारी मरुस्थल 1/3 भाग को घेरे हैं। शेष भागों में विषुवत रेखीय वन मिलते हैं, जिनमें टिसीटिसी मक्खियों, अस्वास्थ्य कर जलवायु तथा जंगली पशुओं के कारण बहुत कम जनसंख्या मिलती है।

 

नील नदी के डेल्टा में जनसंख्या अधिक मिलती है, क्‍योंकि यहाँ बाढ़ द्वारा लाई गई मिट्टी के क्षेत्रों में कृषि उत्पादन की सुविधा है। वर्ष भर नहरों द्वारा सिंचाई की व्यवस्था पाई जाती है जिसके सहारे वर्ष में तीन फसलें तक प्राप्त की जाती हैं और कपास, गन्ना तथा तम्बाकू जेसी औद्योगिक फसलें पैदा की जाती हैं जिनके लिए अधिक श्रमिकों की आवश्यकता पड़ती है।

‘पूर्वी अफ्रीका में अधिकांश जनसंख्या युगाण्डा, केनिया और न्यासालैण्ड में ऊँचे भागों में मिलती है। दक्षिणी अफ्रीका में जनसंख्या मुख्यतः रोडेशिया और दक्षिणी अफ्रीका संघ में मिलती है जहाँ सोना, तॉँबा और एस्बस्टस आदि खनिज पाये जाते हैं और जहाँ की जलवायु भी यूरोपीय लोगों के अनुकूल है।

अफ्रीका में जनसंख्या के वितरण के आधार पर तीन क्षेत्र प्रमुख हैं

  1. अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्रइस महाद्वीप के उत्तरीपूर्वी भागों में घनी जनसंख्या निवास करती है। इस क्षेत्र में जनसंख्या का घनत्व 100 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है। नील नदी के डेल्टाई क्षेत्रों में तो 500 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी से भी अधिक निवास करते हें। अफ्रीका के अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्रों में नील नदी की घाटी, द. अफ्रीका संघ, तटीय मैदानी भाग तथा उत्तरी-पश्चिमी क्षेत्र आते हैं।

 

  1. मध्यम जनसंख्या वाले क्षेत्रअफ्रीका के इन क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व 50 से 100 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है। नदियों की घाटी, डेल्टाई क्षेत्र तथा तटीय भाग मध्यम जनसंख्या वाले क्षेत्रों के अन्तर्गत आते हैं। दक्षिणी अफ्रीका संघ, अल्जीरिया का उत्तरी भाग, घाना, नाइजीरियो तथा मैलेगासी में मध्यम जनसंख्या पायी जाती है।

 

  1. न्यून जनसंख्या वाले क्षेत्रइस महाद्वीप का 50% क्षेत्र न्यून जनसंख्या वाला है। सहारा का मरुस्थल, कालाहारी का मरुस्थल तथा अबीसीनिया का पठार न्यून जनसंख्या के क्षेत्र हैं।

 

रूस में जनसंख्या का वितरण 

रूस में जनसंख्या का वितरण बड़ा ही असमान है। रूस की जनसंख्या कुल14,34,39,832 है देश की 48% जनसंख्या 6 प्रतिशत भाग पर निवास करती है। इसके विपरीत देश के दो-तिहाई भाग पर 6% जनसंख्या रहती हे। रूस में जनसंख्या का जमाव मास्को के औद्योगिक प्रदेश में अधिक पाया जाता है और साइबेरिया के अविकसित ओद्योगिक क्षेत्र में सबसे कम। यहाँ ज्यों-ज्यों पश्चिम से पूर्व की और बढ़ते हैं, जनसंख्या का घनत्व भी कम होता जाता है।

रूस का औसत घनत्व प्रतिवर्ग किलोमीटर 95 व्यक्तियों का है। कुछ क्षेत्रों में इससे भी अधिक तथा कुछ में इससे भी कम घनत्व मिलता है। सबसे अधिक घनी जनसंख्या यूरोपीय रूस के दक्षिणी भागों में मिलती है विशेषकर वोल्गा के ऊपरी भाग से लेकर काले सागर के समुद्रतट के बीच के भू-भाग में भी पाई जाती है।

रूस में जनसंख्या की दृष्टि से तीन क्षेत्रों में विभाजित है

(1) यूरोपीय रूस में जनसंख्या का घनत्व प्रति वर्ग किमी 100 व्यक्तियों का हे, किन्तु इसके मुख्य औद्योगिक क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व 200 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है। इसी भाग में सोवियत रूस के बड़े नगर हैंमास्को, गोर्की, खारकोव, डोनेस्क, ओडेसा और लेनिनग्राड। इस प्रदेश में अधिकांश नगर औद्योगिक हैं तथा जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है। विशेष रूप से काली मिट्टी के क्षेत्र में। यूराल और वोल्गा के बीच जनसंख्या मुख्य रूप से औद्योगिक और तेल क्षेत्रों में निवास करती है।

 

(2) साइबेरियाई रूस में जनसंख्या का घनत्व कम है। अधिकांश जनसंख्या ट्रांस-साइबेरियन रेल-मार्ग के निकट निवास करती है जहाँ प्रति वर्ग किमी 20 व्यक्ति पाये जाते हैं।

 

(3) मध्य एशिया में केवल सिंचित क्षेत्रों अथवा मरुद्यानों में जनसंख्या का घनत्व अधिक हे।

 

जनसंख्या की समस्या का हल 

प्रो. क्लार्क के अनुसार विश्व में बढ़ती हुई जनसंख्या की समस्या को निम्न प्रकार से प्रयल किया जाता है(1) विश्व के घने बसे भागों में विश्व के निर्जन, उजाड़ तथा कृषि योग्य भागों को अन्तर्राष्ट्रीय संधि के अनुसार जनसंख्या का प्रवास किया जाए।

 

(2) बड़े और घने बसे देशों में जहाँ औद्योगीकरण हो रहा है, उन देशों की उत्पादित वस्तुओं के लिए विश्व के अन्य औद्योगिक देश बाजार की सुविधा दें तथा उनके व्यापार पर किसी प्रकार का नियंत्रण अथवा शुल्क न लगाएँ।

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2, परिवार नियोजन – वर्तमान युग में (न केवल भारत में ही नहीं अपितु विश्व के अधिकांश प्राचीन देशों में) प्रजन दर अधिक होने से जनसंख्या में बड़ी तीव्र गति से वृद्धि हो रही हैं। यदि अपव्यय को बचाना है, तो आवश्यक है कि विज्ञान

 

  1. स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धि – उष्ण कटिबंधीय देशों में अधिकतर बीमारियों से उस दुखान्त नाटक पर कभी पर्दा नहीं गिराया जा सकता। ये बीमारियाँ जितने व्यक्तियों को मारती नहीं, उससे दुगुना-तिगुने व्यक्तियों को अपना शिकार बनाकर शक्तिहीन कर देती हैं। अतः इन्हें दूर करना आवश्यक होगा।
  2. संतति सुधार शास्त्र – अब यह बात सर्वमान्य हो गई है कि जनसंख्या में गुणात्मक सुधार करना भी आवश्यक है। सामाजिक अर्थव्यवस्था, पारिवारिक सुख और राष्ट्रीय नियोजन और संतान की सीमा तो आवश्यक है ही किन्तु इसके साथ ही .संतति सुधार कार्यक्रम में भयंकर प्रकृति के छूत या संक्रामक रोगों, एड्स, मृगी, उन्‍्माद, शरीर से अयोग्य, मस्तिष्क के खोखले एवं नैतिक पतन तथा परम्परागत बीमारियों के बीच सहमति करने वाले व्यक्तियों से ग्रस्त व्यक्तियों के विवाह ओर संतानोत्पत्ति पर पूर्ण प्रतिबंध भी होना चाहिए। स्वस्थ बच्चे स्वस्थ राष्ट्र के प्रतीक होते हैं।

 

  1. शिक्षा का प्रसार- परिवार के आकार को रोकने में शिक्षा बहुत महत्वपूर्ण है। शिक्षा से मनुष्य अधिक उत्तरदायी और विवेकपूर्ण होकर जीवन के प्रति बुद्धि संगत दृष्टिकोण रखता है।

 

  1. प्रवास या विदेश गमन (|एशशांक्आंण))जनसंख्या का विश्व वितरण बड़ा ही असमान है। आज भी विश्व में ऐसे क्षेत्र है, जहाँ पृथ्वी पर मानव भाग असहाय हो रहा है। (मुख्यतः) चीन, जापान, इंडोनेशिया, भारत आदि दक्षिण पूर्वी एशिया के देशों) में जहाँ मानवता अर्द्धगग्न और अर्द्ध भूखी रहती है। इन एशिया के देशों में त्राहि-त्राहि मच रही है और शान्ति एक भीषण क्रान्ति में परिणित हो रही है। इसके विपरीत ऐसे भी विस्तृत क्षेत्र है (मुख्यतः आस्ट्रेलिया, अर्जेन्टाइना, उत्तरी पश्चिमी अमेरीका, अफ्रीका, कनाडा तथा लैटिन अमेरीका देशों में) जहाँ जनशक्ति के अभाव के कारण भू-भागों पर स्वच्छन्दता से पशु, भेड़ आदि पाले जाते हैं और यहाँ आवास विदेशियों को इन भू-भागों पर आकर बसने में रोक लगती है। एशिया के अधिकांश घने बसे देशों से (जहाँ जनसंख्या का भाग असहनीय है) प्रवाह अधिक नहीं हुआ है, क्योंकि सामाजिक और धार्मिक भावनाएँ इसके प्रतिकूल रही हैं। यदि इन देशों में एशिया निवासियों को बसने दिया जाए, तो इन देशों का आर्थिक विकास पूर्ण रूप से हो सकता है।

 

  1. औद्योगीकरण – जिन देशों में अभी तक औद्योगिक उन्नति नहीं हुई है, उनका औद्योगीकरण किया जाए। इस हेतु अधिकतर छोटे और घरेलू उद्योगों को प्रोत्साहन देना चाहिए। क्योंकि छोटे उद्योग जब व्यवस्थित किए जाते हैं, तो कृषि ओर बड़े पैमाने के उद्योग-धंधे के बीच एक आवश्यक सम्बन्ध स्थापित कर लेते हैं। |

 

जनसंख्या के वितरण एवं घनत्व को प्रभावित करने वाले कारक

 

पृथ्वी पर जनसंख्या सर्वत्र एक समान नहीं बसी हुई है। बहुत कम स्थान ऐसे है, जहाँ बहुत घनी जनसंख्या है, किन्तु पृथ्वी पर बहुत अधिक स्थान ऐसे हैं, जो लगभग जन शून्य हैं। सामान्यतः विश्व की लगभग 50% जनसंख्या समस्त भू-भाग के 5% भाग पर निवास करती है। जनसंख्या के इस प्रकार असमान वितरण एवं घनत्व को अनेक घटक या तत्व प्रभावित करते हैं।

सांस्कृतिक तत्व जिसमें मानव की आर्थिक क्रियाएँ जैसेकृषि, परिवहन के साधन, उद्योग एवं व्यापार आदि।

  1. भौगोलिक तत्वजिसमें धरातल, जलवायु (वर्षा एवं तापक्रम), भूमि की उर्वरा शक्ति, नदियां या जल संसाधन, खनिज आदि।
  2. राजनीतिक तत्वयुद्ध एवं सुरक्षा।

 

  1. सास्कृतिक तत्व

सांस्कृतिक तत्व में मनुष्य द्वारा निर्मित तत्व सम्मिलित किए जा सकते हैं। जिनमें कृषि, सिंचाई, परिवहन, औद्योगीकरण ओर व्यापार आदि तत्व हैं।

(1 )सिंचाई –

जहाँ सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है तथा अधिक से अधिक क्षेत्र में सिंचाई से पैदावार भी अधिक ली जाती है, ऐसे क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व अधिक मिलता है। उत्तरी भारत में जनसंख्या अधिक बसी हुई है।

 

(॥) कृषिसामान्यतः

गेहूँ की अपेक्षा चावल की पैदावार अधिक व जल्दी तैयार होती है। गेहूँ की अपेक्षा थोड़े से चावल से ही पेट भर जाता है। चावल हर तरह की मिट्टी में पैदा हो सकता है अतः जनसख्या का घनत्व चावल उत्पादक क्षेत्रों में अधिक पाया जाता है। सम्पूर्ण दक्षिण पूर्वी एशिया इसका उदाहरण है।

 

(॥I ) औद्योगीकरण

जब किसी निर्जन क्षेत्र में कोई उद्योग स्थापित होता है, तो जनसंख्या उसके आसपास बसने लगती है। भारत में भिलाई, कोरबा आदि इसके प्रमाण हैं। जापान की 960 किमी लम्बी पेटी में जापान की अधिक जनसंख्या निवास करती है।

  1. भौगोलिक तत्व

(1) जलवायुधरातलीय स्वरूप की तरह जलवायु भी जनसंख्या के घनत्व को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण कारक है। जलवायु में वर्षा का वितरण तथा तापक्रम जनसंख्या के वितरण पर स्पष्टतः प्रभाव डालते हैं। भारत में वर्षा का वितरण और जनसंख्या के वितरण समान है अर्थात्‌ तप भाग में स्थित बंगाल में जहाँ वर्षा अधिक होती हैं घनत्व भी अधिक है। जैसे-जैसे पश्चिम की ओर वर्षा की मात्रा घटती जाती है, जनसंख्या के घनत्व में भी कमी होती जाती है, क्योंकि यहाँ वर्षभर तथा ऊँचा तापमान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इसी तरह तापक्रम भी वितरण को प्रभावित करता है। विश्व की सर्वाधिक जनसंख्या शीतोष्ण कटिबंधीय जलवायु में निवास करती है, क्योंकि यहाँ का तापमान न तो अधिक ऊँचा रहता है न अधिक निम्न!

 

धरातलीय स्वरूपधरातलीय बनावट का जनसंख्या के वितरण एवं घनत्व पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। पर्वतीय भागों अथवा उबड़खाबड़ अकृति ति वाले धरातल की अपेक्षा मैदानी भागों या समतल पठारों पर जनसंख्या का बसाव अधिक पाया जाता है। भारत की 3/4 जनसंख्या मैदानों में ही निवास करती हैं। मैदानों में कृषि, परिवहन और औद्योगिक सुविधाएँ अधिक पाई जाती हैं। गंगा-सिन्धु का मैदान, यांग्टीसिक्यांग का मैदान विश्व के सर्वाधिक घने बसे क्षेत्रों में से है।

जल संसाधनपेयजल की सुविधा, सिंचाई की सुविधा, नदियों या जलाशयों के कारण रहती हैं। नदियाँ बाढ़ के समय प्रतिवर्ष नई कोप की उपजाऊ मिट्टी भी जमाती है। इसलिए नदियों की घाटियों में जनसंख्या का बसाव अधिक हुआ है। मरुस्थलों में अधिकांश मरुस्थल जनशून्य है।

 

भूमि की उर्वरा शक्तिविश्व में जहाँ कहीं उपजाऊ भूत है, वहाँ कृषि की जनसंख्या निवास करती है। जैसेगंगा तट, सतलज का मैदान, यांग्टीसिक्यां का मैदान, यूक्रेन प्रेरीज प्रदेश आज भी उपजाऊपन के कारण घने बसे हुए हैं।

खनिज संसाधनजिन क्षेत्रों में खनिज पाए जाते हैं, वहाँ भी जनसंख्या का जमाव अधिक हो गया है। सोवियत रूस, यूरोप और संयुक्त राज्य की अधिकांश जनसंख्या खनिज क्षेत्रों के समीप बसी हुई है।

 

  1. राजनीतिक तत्व

राजनीतिक उथल पुथल के कारण भी जनसंख्या का स्थानान्तरण बड़े पैमाने पर होता है। 1947 में भारत-पाक विभाजन के कारण बहुत बड़ा जन समुदाय पाकिस्तान से भारत आ गया था। आस्ट्रेलिया तथा दक्षिणी अफ्रीका की श्वेत नीति के कारण ये देश आज भी कम जनसंख्या वाले हैं।

 

  1. जनांकिकीय तत्व

इसके अन्तर्गत प्रजनन दर, आवास-प्रवास जन्मदर एवं मृत्यु दर को सम्मिलित किया जाता है।

  • जन्म दरएक वर्ष की अवधि में किसी देश के प्रति 1000 व्यक्तियों के पीछे जितने शिशु जन्म लेते हैं, उसे जन्म दर कहा जाता है। जनसंख्या की वृद्धि, मृत्यु दर पर निर्भर करती है। जन्मदर जितनी अधिक होगी, जनसंख्या की वृद्धि भी उतनी तेजी से होगी।
  • प्रजनन दरप्रत्येक देश में जलवायु और रीति-रिवाजों के कारण प्रजनन दर में भिन्नता पाई जाती है। अन्वेषण द्वारा यह देखा गया है कि 14 वर्ष से पूर्व जिन लड़कियों की शादी हो जाती है, वे 910 बच्चों को जन्म देती हैं, जबकि 25 वर्ष की आयु में जिस लड़की का विवाह होता है, वह 4 संतानों से अधिक उत्पन्न नहीं करती। दूसरी ओर मुसलमानों में प्रजनन दर हिन्दुओं की अपेक्षा अधिक होती हैं, क्योंकि उनमें बहुपत्नि प्रथा चालू है।
  • आवास-प्रवासआवास-प्रवास भी जनसंख्या के घनत्व को प्रभावित करते हैं, यूरोपीय देशों के प्रवासी प्रतिवर्ष. अफ्रीका या एशिया के देशों में आकर बस जाते हैं, इसलिए जिन देशों में ये लोग आकर बसे हैं, वहाँ की जनसंख्या में वृद्धि हुई तथा जिन देशों को उन्होंने छोड़ा वहाँ की जनसंख्या में कमी हुई। इस प्रकार के अनेक प्रमाण विश्व के देशों में मिले हैं।

जावा में 1920 से 1930 तक आवास के कारण घनत्व 20 प्रतिशत बढ़ गया। इसी कारण भारत से कितने ही प्रवासी विदेशों में जाकर बस गए हैं, जिससे वहाँ का घनत्व बढ़ गया है।

  • मृत्यु दरएक वर्ष में प्रति 1000 व्यक्तियों के पीछे जितने व्यक्तियों की मृत्यु होती है, उसे मृत्यु दर कहा जाता है। जनसंख्या में कमी मृत्यु दर द्वारा होती है, अतः अधिक मृत्यु दर होने पर जनसंख्या में कमी होती है।

 

जनसंख्या वृद्धि का विकास पर प्रभाव.

जिन विकासशील एवं अविकसित देशों में जनसंख्या की वृद्धि तीत्र गति से हो रही है, वहाँ आर्थिक विकास पर इसका बुरा प्रभाव  पड़ रहा है। प्रभाव निम्नलिखित हैं

 

  1. निम्न जीवन स्तर- जनसंख्या वृद्धि के कारण जीवन स्तर में भी गिरावट आ जाती हे, क्योंकि भरण-पोषण एवं विकास के साधन सीमित होते हैं। –
  2. बेरोजगारी की समस्यातीव्र गति से बढ़तीं जनसंख्या के कारण विकासशील एवं अविकसित देशों में बेरोजगारी की समस्या बहुत विकट रूप धारण करने लगती हैं। इससे न केवल बेरोजगारी अपितु आर्थिक, सामाजिक ओर राजनीतिक दृष्टि से भी संकट उत्पन्न हो गया है।
  3. कृषि भूमि पर दबाबकृषि योग्य भूमि तथा उसके उत्पादन की एक निश्चित क्षमता होती है। प्रति व्यक्ति भूमि त्था उत्पादन की कमी जनसंख्या वृद्धि का परिणाम है।

मानव भूगोल प्रकृति एवं विषय क्षेत्र | मानव भूगोल की प्रकृति

  1. प्रदूषण की समस्या*« तीव्र जनसंख्या वृद्धि के कारण नगरों के लोगों को स्वच्छ जलवायु की यूर्ति ठीक ढंग से नहीं हो पती। इससे तरह-तरह की बीमारियाँ फैलती हैं। वाहनों की वृद्धि स्रे ध्वनि तथा वायु प्रदूषण में भी वृद्धि हो रही हे।
  2. प्राकृतिक साधनों का शोषणजनसंख्या वृद्धि की माँग की पूर्ति के लिए प्राकृतिक साधनों का शोषण भी तीज गति से हो रहा हेै।
  3. शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं पर दबावतीत्र जनसंख्या वृद्धि के कारण, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। न केवल सेवाओं के स्तर में गिरावट आती है, अपितु अनेक लोग इससे जंचित रह जाते हैं। |

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